Thursday, August 31st, 2017
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आजादी : चिड़ियाघर से जानवरों की भी होना चाहिए




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अनादिकाल से लेकर अब तक कहीं न कहीं कोई न कोई किसी पर राज करने की कोशिश करता रहा है। क्या हमें उस गुलामी के दर्द का एहसास नहीं है? बरसों अंग्रेजों की गुलामी में बंधने के बाद आजाद आकाश में विमुक्त उड़ान का महत्व क्या हमें पता नहीं है? उस गुलामी की पीड़ा तो हम अपने बुजुर्गों के मुंह से सुन चुके हैं, फिर क्यों भूल गए कि चिड़ियाघर में बंद पशु-पक्षी, जानवरों को भी उस कैदखाने में तकलीफ होती होगी। सुबह-शाम भोजन फेंक देना और 24 घंटे सांसे लेने के लिए छोड़ देना क्या अमानवीय नहीं है? महज इसलिए कि आप और आपके बच्चे अपने से अलग जीव और उनकी हरकतें देखकर खुश होते हैं और तालियां बजाते हैं। सिर्फ इसलिए बेजुबान जानवरों को पिंजरों में रखना उचित नहीं है। क्या हम आजादी का महत्व नहीं समझते? हम तो इसलिए सलाखों के पीछे जाते हैं क्योंकि कुछ अपराध करते हैं किंतु इन बेजुबान जानवरों को निरपराध ही सलाखों के पीछे कैद करके रखा जा रहा है। प्रकृति का जीव प्रकृति की खुली हवा में ही रहे तो बेहतर है।

आजाद हिंदुस्तान में जीवन की आजादी होनी चाहिए न कि सिर्फ मानव की। मेरे विचार से चिड़ियाघरों का कोई औचित्य नहीं है। जानवरों को उनके उपयुक्त वातावरण में जीने का अधिकार दिया जाना चाहिए। जब आप खुले आकाश के नीचे उनकी स्वभाविक गतिविधियों को देखेंगे तो यह तय है कि आपको वो खुशी मिलेगी जो आपने चिड़ियाघर में उन्हें देखकर महसूस नहीं की होगी। जिन्होंने भी एक सफारी और चिड़ियाघर दोनों को देखा है उन्हें पता होगा कि सफारी में दहाड़ता हुआ शेर, शेर लगता है किंतु पिंजरे में कैद शेर 20 फीट के दायरे में चक्कर लगाता हुआ बिल्ली के जैसा प्रतीत होता है।

अतः आइए आज आजादी के 68वें वर्ष में हम यह प्रण लें कि आजाद हिंदुस्तान में हम जीवन की आजादी की आवाज बुलंद करेंगे न कि सिर्फ लोगों की।

जय हिन्द, जय भारत।

 

सपना खंडेलवाल

संपादक

 

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