Friday, August 25th, 2017
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आपके संबंधों के बारे में




Spiritual

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क्या आप उन लोगों को लेकर द्वंद्व में हैं जिनको आप सर्वाधिक प्रेम करते हैं? क्या आप अपने संबंधों में अविश्वसनीय ऊंचाइयों के बाद एक समान निम्नता अनुभव करते हैं? स्वार्थ का दूषित प्रेम ’लगाव’ होता है, वह केवल आपके बारे में होता है। आप अपनी आसक्ति के लिए मूर्त या अमूर्त वापसी की अपेक्षा करते हैं। आप लोगों से मांग करते हैं और उनको बांधते हैं। आप असुरक्षित, संवेदनशील और खतरा अनुभव करते हैं। आपकी अपेक्षा कभी पूरी होती प्रतीत नहीं होती है। जितना अधिक लोग आपके लिए करते हैं, उतना अधिक आप चाहते हैं। संबंध इस प्रकार द्वंद्वपूर्ण हो जाता है। अंत में, वह विफल हो जाता है और आप व्यक्ति को खो देते हैं। वेदांत का युगों पुराना दर्शन हमें, दूसरों को और हमारे आसपास की दुनिया को नये तरीके से परिभाषित करने के नये तरीके से हस्तक्षेप करता है। उस तरीके को जो युवा पीढ़ी को आकर्षित करेगा। वह समर्पण, विश्वास और अभ्यास की छलांग लगा लेता है। अपने मस्तिष्क को विकसित करें लोगों के बड़े घेरे से जुड़ें, समुदाय, देश, मानवता से। लोक संग्रह के लिए कार्य करें, विश्व कल्याण के लिए। जैसे-जैसे आप उच्चतर से जुड़ते जाते हैं आप निम्नतर से अलग होते जाते हैं। सच्चा प्रेम उत्पन्न होता है और आपके संबंध अंतहीन संघर्षों से मुक्त हो जाते हैं जो अभी व्याप्त हैं। अपने जीवन में खालीपन की बार-बार याद दिलाने वाले बोध को भरने के लिए आप अपनी खुशी के लिए लोगों पर निर्भर रहते हैं। इस प्रकार शुरुआत बिंदु ही दोषपूर्ण होता है। केवल जब आप भीतर से खुश होते हैं कि आप दूसरों के साथ अर्थपूर्ण संबंध स्थापित कर सकते हैं। खालीपन को भरने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना निरर्थक होता है। वेदांत कहता है आप परिपूर्ण हैं, पूर्णतः भरे हुए। आपको किसी की जरूरत खुद को खुश रखने के लिए नहीं होती है। अपनी परिपूर्ण स्थिति का ज्ञान प्राप्त करें। लोगों से उसके लिए प्रेम करें जो वे हैं, अच्छे, साथ ही साथ बुरे। यह बात समझ लें कि लोग अपनी प्रकृति के अनुसार व्यवहार करते हैं। क्या आप एक शेर से उसकी क्रूरता के लिए और एक हिरण से उसकी कायरता के लिए घृणा करते हैं? आप दोनों जीवों को समान रूप से प्रेम करते हैं क्योंकि आप उनकी प्रकृति को समझते हैं और उनको उस रूप में स्वीकार करते हैं जो वे होते हैं। आपको लोगों को उस रूप में स्वीकार करने से कौन रोकता है जो वे होते हैं? आप क्यों शिकायत करते हैं जब एक साझेदार क्रोधित हो जाता है या एक बच्चा डरपोक होता है? दूसरों को खुद के अंग के रूप में देखें और आप उनके सर्वोत्तम गुणों पर ध्यान केंद्रित करें। आप विरोधियों को समझदार के रूप में, प्रतियोगियों को कॉमरेड के रूप में देखेंगे। आप दूसरों की जीत का जश्न मनाएंगे मानो वह आपकी खुद की जीत हो। इस प्रकार आपकी खुशियां खरबों गुणा बढ़ जाएगी। आज आप केवल तब खुश होते हैं जब आपके साथ अच्छी चीजें होती हैं। अंत में प्रेम ईश्वर की ओर घूम जाता है। आप सभी जीवों में ईश्वर की पूजा करते हैं। वेदांत कहता है ईश्वर केवल एक है। अगर आप अलगाव देखते हैं, वह आपका भ्रम है। बिल्कुल जैसे प्रकाश की किरण सात भिन्न रंगों में अपवर्तित होती है, आप विभेद और सीमा रेखा देखते हैं क्योंकि आप अपने शरीर, मस्तिष्क और बुद्धि के प्रिज्म से दुनिया को देखते हैं। आप अधिकतम अलगाव देखते हैं जब आप अपने शरीर से पहचान करते हैं। दुनिया को अपने मस्तिष्क से देखें और प्रेम का आपका दायरा आपके परिवार को समाहित करने के लिए विस्तृत हो जाता है।

 

साभारः जया राव

 

 

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