Sunday, August 27th, 2017
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…तो इसलिए बंद हुई थी एक रुपए नोट की छपाई




Business
एक रुपए के नोट की छपाई में 1.14 रुपए की लगती है लागत

नई दिल्ली। हम जब भी मार्केट जाते हैं, तो जिन चीजों पर डिस्काउंट मिलता है, उन्हें खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। हम किसी भी चीज को खरीदने के लिए कभी भी उसकी कीमत से ज्यादा रुपए नहीं देते हैं या फिर हम वह चीज नहीं लेते हैं, लेकिन सरकार यह गलती कर रही है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा बंद हो चुके एक रुपए के नोट को फिर से शुरू करने जा रहा है। दरअसल, एक रुपए के नोट को छापने की लागत 1.14 रुपए लगती है, इसी वजह से एक रुपए के नोट की छपाई बंद कर दी गई थी। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में यह फेक्ट सामने आया है। आरटीआई ऑफिसर सुभाष चंद्र अग्रवाल ने एक आरटीआई दाखिल किया था, जिसमें सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसपीएमसीआईएल) ने जवाब में कहा कि साल 2014-15 के लिए ऑडिट अभी चल रहा है और असल कीमत ऑडिट के बाद ही बता पाएंगे।

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एसपीएमसीआइएल ने आगे कहा, “लागत सिद्धांत और लागत पैमाना के अनुसार एक रुपये की लागत 1.14 रुपये है।” अग्रवाल ने बताया कि 1994 में एक रुपये के नोटों की छपाई बंद कर दी गई थी, क्योंकि इसकी कीमत से ज्यादा इसकी छपाई लागत थी। इसी वजह से बाद में दो रुपये और पांच रुपये के नोटों की भी छपाई बंद कर दी गई थी। अग्रवाल ने यह भी जानकारी दी कि केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने 16 दिसंबर 2014 की अधिसूचना के जरिए अंततः 6 मार्च 2015 को 1 रुपये का नोट नए सिरे से जारी करने का ऐलान लिया था। अन्य करेंसी नोटों पर रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं, जबकि 1 रुपये के नोट पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। अग्रवाल ने इसकी भी जांच की मांग की है।

 

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