Tuesday, August 15th, 2017
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पहले भी हुआ करती थी किताबों की “होम डिलीवरी”




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किताबों के पढऩे का सिलसिला आज से नहीं बल्कि सदियों से चला आ रहा है, शायद इसलिए कहा गया है कि किताबें हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। आज के समय में ऑनलाइन ई-कॉमर्स वेबसाइट्स के जरिए हम अपनी पसंदीदा किताब अपने घर पर ऑर्डर देकर मंगा सकते हैं, लेकिन पुराने जमाने में ऐसा नहीं हुआ करता था। लेकिन ऐसा नहीं है कि लोगों तक किताबें पहुंचा नहीं करती थीं । वो अपनी पंसदीदा किताबों को पढऩे से वंचित रह जाते थे। बल्कि उस समय भी चलती-फिरती लाइब्रेरी हुआ करती थी। आइए आपको दिखाते हैं पुराने समय की कुछ तस्वीरें  जो बताती हैं कि उस समय भी लोगों का किताबों के प्रति कितना लगाव था।

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वर्ष 1925 की ये एक बुक मोबाइल वैन है।

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ये तस्वीर है 70 के दशक की  जब ईरान के कुर्दिस्तान की मोबाइल लाइब्रेरी चला करती थी।

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बच्चों की किताबों की चलती-फिरती लाइब्रेरी।

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ये है 1927 में सिनसिनाती की चलती-फिरती लाइब्रेरी की तस्वीरें।

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60 के दशक में अंदर से ऐसी होती थी मोबाइल वैन।

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1933 में कॉम्प्टन रोड की एक पब्लिक लाइब्रेरी

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इच मोबाइल बुक के बाहर किताब पढऩे वालों की लाइन लगा करती थी।

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1920 में मोबाइल वैन के अंदर अपनी फेवरेट किताब पढ़ते बच्चे।

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1973 में एनी एरनडल के पास की एक पब्लिक लाइब्रेरी जहां लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था भी की जाती है।

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