एक मशहूर कवियत्री, जिनको अपनी पहली नज्म के लिए मिला था ज़ोरदार थप्पड़

Bundela Priya Raja

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“मैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थी

सिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जाने

क्या ख्याल आया

उसने तूफान की एक पोटली सी बांधी

मेरे हाथों में थमाई

और हंस कर कुछ दूर हो गया”

ये लाइनें हैं “एक मुलाकात” कविता से जिसे बड़ी ही खूबसूरती से लिखा गया है  और इस कविता में रूह भरने वाली हैं अमृता प्रीतम, जो एक मशहूर पंजाबी कवियत्री और लेखिका थीं। पंजाब (भारत) के गुजराँवाला जिले में पैदा हुईं अमृता प्रीतम को पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री माना जाता है। उन्होंने कुल मिलाकर लगभग १०० पुस्तकें लिखी हैं जिनमें उनकी चर्चित आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ भी शामिल है। लेखन के क्षेत्र में अपने अदभुत योगदान के लिए अमृता प्रीतम जी को भारत के दूसरा सबसे बड़े सम्मान पद्मविभूषण से नवाजा गया और इससे पहले साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी अलंकृत की गईं थीं।

अमृता प्रीतम के बारे में, उनके प्रेम संबंध और पूरे जीवन के बहुत से किस्से और कहानियां हैं, जो उनके जानने वालों ने लिखे हैं, और अमृता प्रीतम जी ने खुद भी अपनी हर एक रचना में अपने जीवन के रंगों को ही भरा है। अमृता प्रीतम जी के बारे में एक कहानी बड़ी ही प्रसिद्द है कि जब बचपन में उन्होंने पहली बार अपनी पहली नज्म लिखी थी तो उन्हें वाहवाही या फिर कोई पुरुस्कार नहीं मिला था बल्कि उनके पिता से गाल पर एक जोरदार चपत मिली थी।  दरअसल हुआ ये था कि अमृता प्रीतम जी ने अपने ज़हन में एक काल्पनिक प्रेमी को गढ़ा था और उसे उन्होंने राजन नाम भी दिया था।

अमृता ने इसी नाम को अपनी ज़िंदगी की पहली नज़्म का विषय बनाया। उन्होंने राजन को विषय बना कर ही अपनी पहली नज़्म लिखी थी। जब वो स्कूल में पढ़ती थीं तो अपनी नज्म को उन्होंने ये सोचकर अपनी जेब में डाल लिया कि स्कूल जाकर अपनी सहेली को दिखाएंगी। स्कूल जाने से पहले अमृता अपने पिता के पास कुछ पैसे मांगने गईं। उन्म्के पिता ने वो पैसे उनके हाथ में न देकर उनकी जेब में डालने चाहे। पिता ने उसी जेब में पैसे डाले जिस जेब में वो नज़्म रखी हुई थी। पिता का हाथ उस नज़्म पर पड़ गया और उन्होंने उसे निकालकर पढ़ लिया।

पूछा कि क्या इसे तुमने लिखा है। अमृता ने झूठ बोला कि ये नज़्म उनकी सहेली ने लिखी है। उन्होंने उस झूठ को पकड़ लिया और उसे दोबारा पढ़ा। पढ़ने के बाद पूछा कि ये राजन कौन है? अमृता ने कहा, कोई नहीं। उन्हें ऐतबार नहीं हुआ। पिता ने उन्हें ज़ोर से चपत लगाई और वो काग़ज़ फाड़ दिया।उनके पिता को भी उस समय ये नहीं मालूम था की उनकी बेटी एक दिन अपने लेखन की कला से जादू कर देगी और लोगो को अपनी कविताओं और लिखावट से दीवाना बना देंगी।

अमृता प्रीतम जी की कुछ मशहूर रचनाएँ हैं-

उपन्यास– पांच बरस लंबी सड़क, पिंजर, अदालत, कोरे कागज़, उन्चास दिन, सागर और सीपियां

आत्मकथा-रसीदी टिकट

कहानी संग्रह– कहानियाँ जो कहानियाँ नहीं हैं, कहानियों के आँगन में

संस्मरण– कच्चा आंगन, एक थी सारा

कविता संग्रह- लोक पीड़ (१९४४), मैं जमा तू (१९७७), लामियाँ वतन, कस्तूरी, सुनहुड़े (साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त कविता संग्रह तथा कागज़ ते कैनवस, ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त कविता संग्रह सहित १८ कविता संग्रह हैं।

अमृता जी की लिखी पिंजर भी एक बहुत ही मशहूर रचना थी जिस पर फिल्म भी बनाई गई थी, इस फिल्म में उर्मिला मातोंडकर ने मुख्य भूमिका निभाई थी।