Saturday, October 21st, 2017 21:02:30
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जॉब में डिग्री खो रही है वेल्यू, स्किल हुआ जरूरी- संदीप अत्रे




जॉब में डिग्री खो रही है वेल्यू, स्किल हुआ जरूरी- संदीप अत्रेEducation & Career

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‘‘जीवन में कुछ करने के लिए बहुत पहले ही चिंतन मनन शरू करें और वो एक चीज ढूंढ ले जिसके लिए आप पैदा हुए है। और अगर उन्हें आखिरी तक भी यह समझ नहीं आता कि उन्हें क्या करना चाहिए तो फिर उनको कोई भी एक राह पकड़ लेना चाहिए और फिर उसे छोड़ना नहीं चाहिए।’’ जाने-माने मैनेजमेंट और मोटिवेशनेल स्पीकर, फाउंडर-डायरेक्टर ऑफ CH- EdgeMakers और फाउंडर-डायरेक्टर आफॅ Socialigence डॉ. संदीप अत्रे से Youthens news टीम द्वारा किए गए साक्षात्कार में संपादित अंश कछ इस प्रकार हैं-

प्रश्न 1. आज अमीर-अमीर होता जा रहा है और गरीब-गरीब ऐसा ही एजुकेशन में भी हो रहा हैं कि ब्राइट स्टूडेंट आगे निकल रहे है पर जो ऐवरेज स्टूडेंट्स वह आगे नहीं निकल पा रहे हैं ऐसा क्यों?

ऐवरेज स्टूडेंट इसलिए ऐवरेज होता जा रहा हैं क्योंकि जब वो क्लास में कुछ पढ़ने जाते है तो वह पहले से कुछ पढ़कर नहीं आता है। वो सीधे क्लास पर डिपेंड रहता है जो भी क्लास में होता है। जबकि ऐवरेज स्टूडेंट को तो क्लास में और पढ़कर आना चाहिए। जिसे आज कल इंग्लिश में कहते है प्री-रीडिंग। तो उन्हें प्री-रीडिंग करके आना चाहिए।

प्रश्न 2. आज कॉलेज और स्कूल में ऐसी फेसेलिटी क्यों नहीं मिलती की स्टूडेंट्स को पढ़ाई के लिए कोचिंग इंस्टीट्यूट ज्वॉइन ही नहीं करना पड़े।
स्टूडेंट कोचिंग खुद से जाता हैं और उसे लगता है कि उसे कोचिंग की जरूरत है। तो जब तक टीचर, स्टूडेंट्स में पढ़ने की तरफ एक्सीलेंट अप्रोच लगा के इंटरेस्ट डेवलप करने की काबिलयत विकसित नहीं करेंगे तब तक वह कोचिंग क्लास जाएंगे। क्योंकि कोचिंग क्लास के टीचर चीजों को इंटरेस्टींग और पढ़ाई को इंस्पायरिंग बना रहे हैं। जब तक वो पढ़ाई को वह इंटरेस्टींग और इंस्पायरिंग नहीं बनाएगे तब तक वह कोचिंग क्लास जा कर पढ़ेगे।

प्रश्न 3. अच्छे-अच्छे कॉलेजो से डिग्री लेने के बाद भी स्टूडेंट्स जॉब के लिए भटकते हैं और उससे ज्यादा कोचिंग इंस्टीट्यूट्स दावा करते है आप कोचिंग कीजिए प्लेसमेंट की ग्यारंटी हमारी।
पहले डिग्री के थु्र जॉब मिलता था उस समय में डिग्री की वेल्यू थी। अब डिग्री इतनी ज्यादा बटने लग गई है, डिग्री की वेल्यू खो रही है तो आपको डिग्री कि अलावा कुछ स्किल्स और आना चाहिए तो जो स्किल्स आना चाहिए वह कोचिंग इंस्टीट्यूट डेवलप कर रहीं है। इस वजह से कोचिंग इंस्टीट्यूट बोल रहे है कि हम आपका प्लेसमेंट करा देंगे। आज कंपनी को ऐसे स्टूडेंट्स चाहिए  जिसमें डिग्री के साथ स्किल्स भी हो। तो वो ऐसे बच्चों को ले जाती है। और बाकी जो डिग्री पूरी कर के आ रहे है वो कहते है अब हमको भी स्किल डवलप करना पड़ेगी। इस वजह से हर बच्चा कोचिंग की तरफ जाता है। इसका एक और तरीका है कि स्टूडेंट्स को कॉलेज और कोचिंग पर डिपेंड होने की बजाए खुद से वो स्किल्स डवलप करते आना चाहिए।

प्रश्न 4.आज स्थितियां इतनी नाजुक हो गई की अगर स्टूडेंट्स कोई सी भी एंट्रेस हो या परीक्षा में फैल होने के बाद बहुत जल्दी डिप्रस्डे हो जाते है या ऐक्सस डिप्रेशन होने की वजह से सुसाइड कर लेते है। तो इन स्थितियों को बदलने के लिए क्या कर सकते हैं।
डिप्रेशन जैसी स्थिति से बचने के लिए ये चार चीजें आपको सबसे ज्यादा मदद करेगी-
The kind of people you meet, the kind of books you read, the kind of thoughts you listen and the kind of company you keep- the kind of person you become.

प्रश्न 5.स्टार्ट अप का क्रेज जितनी तेजी से बूम हुआ था यंगस्टर्स में अब उतनी ही तेजी से यह फैल हो रहा हैं। कहां मिस मैनेजमेंट हो रहा    है ?
सभी चीजों के लिए अलग-अलग स्किल्स होती है। आज कल होता यह है कि जो अंत्रोप्रेन्योर बनते है स्टार्टअप खोल कर, तो उनमें अंत्रोप्रेन्योर बनने के गुण तो होते है पर जब क्लाइंट बना लेते हैं काम शुरू हो जाता है, पैसा आने लग जाता हैं तो इनको ऑर्गेनाइजेशन बिल्डर बनना पड़ता है और जो लोग यह भी कर लेते है उन्हें बिजनेस करना नहीं आता। उन्हें यह नहीं पता बता होता कि कॉस्ट कैसे सेव होती है, कैसे एक्सपेंसेस को प्लान किया जाता है, किस तरह से मार्जिन क्रिएट करना होता है ये सब उन्हें नहीं आता हैं। तो हो यह रहा है कि there are people who are succedding as an entrepreneur but they are failing as a businessman or an organization builder.

प्रश्न 6.सोशल इंटेलीजेन्स क्या है? क्यों बहुत ज्यादा जरूरी हो गया आज के समय में।
इंसान के अपने इमोशंस और दूसरे के इमोशंस को समझने की काबिलियत और उसके द्वारा अपने बिहेवियर को कस्टमाइज करने की स्किल सोशल इंटेलिजेंस कहलाता है। यह हर जगह जरूरी है चाहे आर्मी हो, स्पोर्टस हो, रिलेशनशिप हो। वो लोग बहुत ज्यादा अच्छा करते है जिनमें इसकी समझ होती है। उदाहरण के तौर पर मोदी जी बहुत सोशल इंटेलीजेंस हैं वो समझ पाते है कि लोगों के दिमाग में क्या चल रहा हैं। जब क्राउड सामने होता है तो उसकी नब्ज समझते है और उस हिसाब से बोलते हैं। तो इस प्रकार जिनमें सोशल इंटेलीजेंस होती है वह अच्छा कर पाते है।

प्रश्न 7. सोशल इंटेलीजेन्स भी पर्सनालिटी का पार्ट हैं? इसके लिए कैसे स्किल्स को डवलप किया जा सकता हैं?
बहुत बड़ा पार्ट है। अगर यह स्किल डवलप करना है तो उसके लिए उन्हें लोगों को पहले देखना शुरू करना पड़ेगा। क्योंकि इमोशन जो होते है आपकी बॉडी से दिखते है, मतलब आपके जेश्चर, एक्सप्रेशन, पोश्चर से और आपके शब्दां से आपके विचार दिखते हैं। अगर आपको किसी के इमोशंस समझना हो तो आपको उसके नॉन वर्लबल बिहेवियर (जेश्चर, एक्सप्रेशन, पोश्चर) समझ में आना चाहिए।

प्रश्न 8.नॉन वर्बल बिहेवियर की बात कर रहे है पर जितना ज्यादा हम सबसे इंटरएक्ट होते हैं, बात करते है तभी तो लोगों को जान पाते है।
एक साइंटिस्ट हुआ करते थे मेहराबिअन उन्होंने कहा था पहली बार कि इंसान का 93 प्रतिशत कम्यूनिकेशन नॉन वर्लबल बिहेवियर है और सिर्फ 7 प्रतिशत वर्बल बिहेवियर है। तो अगर आपको 93 प्रतिशत समझ विकसित करना है तो आपको उसके हाव भाव को समझना होगा। और अगर सिर्फ 7 प्रतिशत समझ चाहिए तो उसके शब्द ध्यान से सुनिए।

प्रश्न 9.आज कल कंपनी भी इम्प्लोय की एफबी प्रोफाइल विजिट करती हैं, तो क्या सोशल मीडिया के द्वारा भी कंपनी नॉन वर्बल बिहेवियर को आब्जर्व करती हैं।
हां, जिस तरह के पोस्टर्स वो डालता है, फोटोज़ अपलोड़ करता है। तरह-तरह के विचार वो शेयर करता है। जिस तरह के पोस्ट वह लाइक कर रहा है, शेयर कर रहा है। वह सब कुछ उसके बारे में कुछ न कुछ बताता है। Undoubtly यह बात महत्वपूर्ण है इसलिए अपने आपको मैनेज करना सीखों, अपनी प्रोफाइल को मैनेज करके रखों।

प्रश्न 10. अपनी पढ़ाई कम्प्लीट करने के बाद भी स्टूडेंटस यह नहीं समझ पाते है कि उन्हें करना क्या है उसके बाद वह 2 महीनें यहां जॉब करता है, 2 महीनें कहीं और ऐसी स्थिति मैं वो कैसे समझे की उन्हें क्या करना हैं?
ऐसे में दो तरीके से करियर बनाया जा सकता हैं। एक तो है पहले से ही चिंतन, आत्मलोकन करना शुरू करें और वो एक चीज ढूंढ ले जिसके लिए आप पैदा हुए हो,अगर वो नहीं किया है तो सबसे अच्छी करियर अडवाइस जो हरिवंश राय बच्चन ने दी हैं-

मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवला,
‘किस पथ से जाऊँ?’ असमंजस में है वह भोलाभाला,
अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूँ-
राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला।

तो जिन्हें इस उम्र तक भी यह समझ नहीं आता कि वह किस चीज के लिए बने है, तो फिर उनको कोई भी एक राह पकड़ लेना चाहिए और फिर उसे छोड़ना नहीं चाहिए। तो ऐसे कुछ स्ंजम ठसववउमते होते है जिन्हें शुरू में सक्सेस भले ही नहीं मिले पर लगे रहेंगे तो मिल जाएंगी। तो जगह- जगह खड्डे खोदने से अच्छा है कि एक जगह पर ही खोदे जाए।

यूथ को संदेश
कॉलेज की डिग्री के साथ अपनी स्किल्स पर भी वर्क करना बहुत जरूरी हैं। क्योंकि कंपनी स्किल्ड वर्कर को पहले प्रायोरिटी देती हैं।

 

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