Tuesday, October 24th, 2017 07:57:30
Flash

पाकिस्तान में हिंदू विवाह कानून को मिली मंजूरी, अब शादियों को मिलेगी कानूनी मान्यता




Social

indian marriage

पाकिस्तान के हिन्दू विवाह विधेयक-2017 को पाकिस्तानी संसद ने पारित कर दिया. यह हिन्दू समुदाय का पहला विस्तारित पर्सनल लॉ है. निचला सदन यानी नेशनल असेम्बली इस विधेयक को पहले ही मंजूरी दे चुकी है लेकिन बाद में सीनेट ने इसमें कुछ बदलाव कर दिए थे। बहरहाल राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने इस विधेयक पर मंजूरी की मोहर लगाकर से कानून की शक्ल दे दी। यह तीन प्रांतों पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लागू होगा।

यह विधेयक पाकिस्तानी हिंदुओं के लिए बहुप्रतीक्षित था एवं मंजूरी के बाद काफी तसल्लीकरक है क्योंकि पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू इस विधेयक को व्यापक तौर पर स्वीकार करते हैं क्योंकि यह शादी, शादी के पंजीकरण, अलग होने (तलाक) और पुनर्विवाह से संबंधित है. इसमें लड़के और लड़की दोनों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल तय की गई है. कानून के मुताबिक, अलग होने के लिए हिंदू दंपती अदालत से तलाक का अनुरोध भी कर सकेंगे। तलाक ले चुके व्यक्ति को इस कानून के तहत फिर से विवाह का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा हिंदू विधवा को पति की मृत्यु के छह महीने बाद फिर से शादी का अधिकार होगा।

पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी वहां की जनसंख्या का करीब 1.6 फीसद है। इस विधेयक की मदद से हिन्दू महिलाएं अब अपने विवाह का दस्तावेजी सबूत हासिल कर सकेंगी.

पाकिस्तानी हिन्दुओं के लिए पहला पर्सनल लॉ
यह पाकिस्तानी हिन्दुओं के लिए पहला पर्सनल लॉ होगा जो पंजाब, बलूचिस्तान और खबर पख्तूनख्वा प्रांतों में लागू होगा. सिंध प्रांत पहले ही अपना हिन्दू विवाह विधेयक तैयार कर चुका है. विधेयक को सीनेट में कानून मंत्री ज़ाहिद हमीद ने पेश किया था, जिसका किसी ने विरोध नहीं किया था. यह इसलिए हुआ क्योंकि, प्रासंगिक स्थाई समितियों में बतौर मेंबर मौजूद सभी सियासी पार्टियों के सांसदों ने हमदर्दी वाला नजरिया जाहिर किया था.

इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ – कट्टरपंथी
‘सीनेट फंक्शनल कमेटी ऑन ह्यूमन राइट्स’ ने 2 जनवरी को भारी बहुमत के साथ विधेयक को मंजूरी दी थी. हालांकि कुछ संगठनों ने इस विधेयक का विरोध किया है. उन्होंने इसे इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है.जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फज़ल के सीनेटर मुफ्ती अब्दुल सत्तार ने कहा कि ऐसी जरूरतों को पूरा करने के लिए देश का संविधान पर्याप्त है. नेक्स्ट पेज पर पढ़ें पूरा आर्टिकल.

Sponsored





Follow Us

Yop Polls

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही जानकारी पर आपका क्या नज़रिया है?

Young Blogger

Dont miss

Loading…

Subscribe

यूथ से जुड़ी इंट्रेस्टिंग ख़बरें पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Subscribe

Categories