Friday, October 20th, 2017 12:34:10
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नाबालिग हो पत्नी तो यौन संबंध बनाना माना जाएगा “रेप” : सुप्रीम कोर्ट




नाबालिग हो पत्नी तो यौन संबंध बनाना माना जाएगा “रेप” : सुप्रीम कोर्टSocial

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देश में लगातार बढ़ रहे यौन शोषण के मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर पत्नी नाबालिग यानि 15-18 साल के बीच हो, तो पति द्वारा उससे संबंध बनाए जाने को रेप की श्रेणी में रखा जाएगा। इसे लेकर एक याचिका कोर्ट में दर्ज की गई थी। ये याचिका इंडिपेंडेंट थॉट नाम की एक संस्था ने दायर की है। इस याचिका के अनुसार यौन संबंध मनाने के लिए पत्नी की उम्र 18 साल होनी चाहिए। इसी के तहत आईपीसी की धारा 375 में दिए गए अपवाद को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
बता दें कि इस धारा के अंतर्गत 15 से ऊपर पत्नी के साथ पति के संबंध बनाने को परिभाषा से बाहर रखा गया है। इसलिए अब 15-18 साल की पत्नी के साथ बने यौन संबंध भी रेप की श्रेणी में ही आएंगे।

दरअसल, भारतीय कानून के अनुसार यौन संबंध के लिए सहमति की उम्र 18 साल है। इस कारण 18 से कम उम्र की लड़की के साथ उसकी रजामंदी के बगैर यौन संबगंध बनाना बलात्कार कहलाता है। लेकिन अगर लड़की की उम्र 15 साल है और वो विवाहित हो, तो उसके पति का उससे संबंध बनाना बलात्कार नहीं माना जाता। आईपीसी की धारा 375ए2 के तहत ये रेप नहीं माना जाता। सिर्फ अगर पत्नी की उम्र 15 से कम है तो ये रेप की श्रेणी में आता है।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने 6 सितंबर को याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। याचिकाकर्ता ने आईपीसी की धारा 375 के अपवाद 2 को संविधान के अनुच्छेद 13, 15 , 21 तक इस हद तक उल्ल्ंाघन करने वाला घोषित करने की मांग की है कि ये 15-18 साल की लड़की के साथ सिर्फ इस आधार पर यौन संबंध की अनुमति देता है कि वह विवाहित है।

इस मामले में केंद्र सरकार की राय है कि भारत की सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए ही ये अहम फैसला लेना पड़ा है। जिसके चलते संसद ने काफी सोच-विचार कर ये फैसला लिया है। देखा जाए तो भारत में बाल विवाह की संख्या काफी कम हो गई है, लेकिन आज भी कुछ जगहें ऐसी हैं, जहां बाल-विवाह का चलन है।

सुनवाई के दौरान पूछे सवाल-

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से कई अहम सवाल पूछे गए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा अगर कोई लड़की अपनी शादी से खुश है और कोई पड़ोसी नाबालिग के साथ पति के रहने की शिरकायत पुलिस से कर दे तो क्या होगा। इस पर याकचिकाकर्ता के वकील गौरव अग्रवाल ने कहा है कि उनका उद्देश्य पारिवारिक मामलों में दखल देना बिल्कुल भी नहीं है, लेकिन बस इतना हो कि लड़की को शिकायत करने का मौका मिले। इसलिए बेहतर होगा कि कोर्ट आईपीसी के सेक्शन 375 को नए सिरे से लिखे। साथ ही ये भी स्पष्ट करे कि पॉक्सो के तहत भी मामला दर्ज हो सकता है।

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