Friday, October 20th, 2017 10:08:37
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ऐसा हो आपका विजिटिंग कार्ड तो जल्दी मिलती है सफलता




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visiting card
आज कल हर युवा के पास अपना एक विजिटिंग कार्ड होता है चाहे वह किसी भी पेशे का हो. मार्केटिंग वाला हो, रिपोर्टिंग हो, बिजनेसमैन हो, हम ऐसा कह सकते हैं कि कोई भी व्यक्ति अगर किसी भी प्रकार का व्यवसाय करता है तो उसके पास उसका या उसकी कंपनी के द्वारा दिया गया एक कार्ड होता है जिसमें उस व्यक्ति की जानकारी होती है जैसे की मेल आईडी , फ़ोन नंबर, कंपनी लोगो, पता आदि जानकारी दी जाती है.

आज कल जब भी व्यक्ति एक दूसरे से मिलते हैं तो उनसे भविष्य में संपर्क करने के लिए अपने विजिटिंग कार्ड का इस्तेमाल करते हैं ताकि उनसे लेनदेन या सामाजिक संपर्क स्थापित किया जा सके. पहले के समय में विजिटिंग कार्ड तो नहीं चलते थे पर राजा महाराजा लोग आपसी सूचना के आदान-प्रदान के लिए राजसी मोहर या पत्र का इस्तेमाल करता थे. तब भी वो लोग अपनी मुद्रा या पत्र को वास्तु सम्मत लिखते थे या बनवाते थे ताकि दूसरे राजा को भेजा गया सन्देश उनके अनुकूल हो. अब आज मुद्रा या पत्र तो चलते नहीं हैं. आज उनका रूप है विजिटिंग कार्ड. इसी बात को ध्यान में रखते हुये आज हम आपको बताने जा रहे हैं कैसा हो आपका विजिटिंग कार्ड.

अगर आपका विजिटिंग कार्ड वास्तु के अनुसार होता है तो आपको व्यापार में सफलता भी ज्यादा मिलने के चांस रहते हैं. आपका कार्ड सबसे पहले आकर्षक होना चाहिये. उसका आकार चौकोर होना चाहिये. अगर आपका कार्ड विषम कोण का हुआ तो आपके सम्बन्ध ज्यादा समय तक नहीं टिकते कोई न कोई अड़चन आ ही जाएगी, इसलिये कार्ड समकोण के होना चाहिए, कहीं से कटा-फटा न हो, किसी भी तरह से पुराना या दाग धब्बे न हो. कहीं से मुड़ा हुआ न हो. कार्ड के बिलकुल बीच में कुछ न लिखें उसको खाली रहने दें. कार्ड का मध्य स्थान जिसे ब्रह्म स्थान कहते हैं उसके खाली रहने की वजह से पॉजिटिव और अनुकूल ऊर्जा आपके व्यापार को मिलती रहती है.

अपनी कंपनी का नाम और पता दक्षिण-पश्चिम की तरफ लिखवाना चाहिये क्योंकि वास्तु में यह कोण स्थिरता यानि कि लंबे समय तक टिके रहना और व्यापकता यानि कि विस्तार का प्रतीक माना जाता है. कंपनी का ट्रेडमार्क या लोगो कार्ड के ईशान कोण यानि कि पूर्व – उत्तर की तरफ हो, क्योंकि यह दिशा शुभ मानी जाती है.

आप अपना फोन नम्बर उत्तर पश्चिम यानि कि वायव्य कोण में लिखें यह दिशा वायु की दिशा मानी जाती है. जिस प्रकार हवा कहीं भी आ जा सकती है तेज और धीमी गति से उसी प्रकार ये गति हमारे व्यापार को लाभ देती है. आप अपना नाम ब्रह्म स्थान के ऊपर भी लिख सकते हैं. मोबाइल नम्बर आग्नेय कोण यानि दक्षिण-पूर्व के कोने पर लिखें.

ये तो हुई कार्ड की बात. अब बात करते हैं रंग की, वैसे ज्योतिष में कहा गया है कि विजिटिंग कार्ड का रंग आपकी कुंडली के ग्रहों के अनुसार होना चाहिए. यह सभी के लिए सम्भव नहीं है इसलिये आप पीले, हरे और लाल रंग का प्रयोग आपने कार्ड में कर सकते हैं. इसके साथ-साथ आपके कार्ड पर की गई लिखावट और चित्रकारी भी सुन्दर होनी चाहिये.

अगर आप अपना विजिटिंग कार्ड बनवाने जा रहे हैं तो इन छोटी बातों को ध्यान में रखेंगे तो आपको जरूर लाभ मिलेगा, ऐसा ज्योतिषचार्यों का कहना है. उनका मानना है कि ऐसा करने से आपके पास सकारात्मक ऊर्जा हस्तांतरित होती है जो आपमें विश्वास पैदा करती है. वास्तु के अनुसार कार्ड बनवाने के बावजूद आप में यह हुनर होना भी जरुरी है कि आप अपने क्लाइंट से कैसे बात करते हैं आपके बोलने का तरीका क्या है. सिर्फ कार्ड बनवाने से व्यापार नहीं बढेगा, आपकी मेहनत और ज्योतिष मिलकर आपको सफल बनायेगें.

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