Friday, October 20th, 2017 09:27:20
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सबसे कम समय में RTI का जवाब देकर इस अधिकारी ने दर्ज किया रिकॉर्ड




सबसे कम समय में RTI का जवाब देकर इस अधिकारी ने दर्ज किया रिकॉर्डSocial

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राइट टू इंर्फोमेशन यानि सूचना का अधिकार जिसे सन् 2005 में लागू किया गया था। जहां पर लोग आवेदन करके किसी भी प्रकार की जानकारी 1 महीने के भीतर प्राप्त कर सकते है। इसी के साथ दिल्ली से 100 किमी दूर पिछड़े जिले के एक नायाब तहसीलदार और सूचना अधिकारी ने मात्र 3 मिनिट 15 सेकंड में आरटीआई का जवाब दिया है जिसका परिणाम यह रहा उनके नाम एक रिकॉर्ड बन गया है। वह पहले ऐसे अधिकारी है जिन्होंने सिर्फ इतने मिनिट में यह जवाब दिया है।

अधिकारी बस्तीराम का यह काम आज उन सभी अधिकारियों के लिए एक प्रेरणा बन गयाहै जो दो – दो सालों तक फाइलों को लटका कर रखते है या मौका आए तो जवाब भी नहीं देते है। इससे पहले भी बस्तीराम के नाम 9 मिनिट में आरटीआई का जवाब देने का रिकॉर्ड दर्ज था। जिसे भी कोई नहीं तोड़ पाया था। मतलब हम कह सकते है कि अधीकारी बस्तीराम ने ही अपना रिकॉर्ड तोड़ा है।

यह है पूरा मामला

मेवात के गांव घागस के रहने वाले सूचना अधिकारी कार्यकर्ता राजुद्दीन ने 30 मई 2012 को नगीना राजस्व विभाग में आरटीआई लगाकर फकरपुर खोरी गांव में लगे क्रेशरों की दूरी के बारे में जानकारी के लिए आरटीआई लगाई थी। समय 12 बजे आवेदन दिया था। 12 बजकर 3 मिनिट 15 सेकेंड पर जवाब मिल गया। उन्हें जवाब देने में इसलिए देरी हो गई क्योंकि उसे कागज पर प्रिंट करना और सिल लगाकर साइन करना था। रिपोर्ट के मुताबिक बस्तीराम ने बताया कि जो जानकारी मांगी गई थी वह उनके टेबल पर ही थी।

बस्तीराम ने जवाब दिया कि किसी गांव से क्रेशरों की दूरी कम से कम 1000 मीटर होनी चाहिए। 4 क्रेशर फकरपुर खोरी गांव के लाल डोरे से 922, 924 962 और 964 मीटर दूर लगे थे। इसकी पहले से रिपोर्ट मौजूद थी। लेकिन आरटीआई में जानकारी सार्वजनिक होते ही इसे सील कर दिया गया।

मीडिया से बातचीत में बस्तीराम ने बतया कि, ‘मेरे पास जो रिकॉर्ड रहता है उसे देने के लिए मैं एक माह का इंतजार नहीं करता। आरटीआई मिलते ही फोटो कॉपी करवाकर हाथों हाथ दे देता हूं। वैसे कानूनन कोई भी सूचना एक माह में देनी होती है। लेकिन रिकॉर्ड मेरे मेरे पास मौजूद था इसलिए यह जानकारी दे दी थी।’ आरटीआई के कार्यकरता रविंद्र चावला ने कहा कि सरकार ऐसे अधिकारियों को सम्मानित करें। इन्हें आरटीआई का रोल मॉडल बनाए। ताकि दूसरे अधिकारी उनसे कुछ सीख सके।

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